तल अवीव: इस्राईल में जर्मनी से पनडुब्बियों और युद्धपोतों की खरीद से जुड़े विवाद की आधिकारिक जांच जारी है। इस मामले में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई मौजूदा और पूर्व अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। यह मामला ‘केस 3000’ के नाम से जाना जाता है।
एक अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच समिति अरबों शेकेल के पनडुब्बी और जर्मन युद्धपोत खरीद समझौतों में संभावित गड़बड़ियों की जांच कर रही है। समिति यह पता लगाना चाहती है कि इन सौदों में कोई गंभीर कमी या अनियमितता तो नहीं हुई।
जांच समिति ने पिछले जनवरी में जारी अपने निष्कर्षों में खरीद प्रक्रिया में ‘व्यवस्थागत खामियों’ का जिक्र किया था। समिति के अनुसार, इस्राईल की सहमति से जर्मनी द्वारा मिस्र को समुद्री रक्षा उपकरण बेचे जाने से इस्राईल की आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ था।
रिपोर्ट के अनुसार, पांच अधिकारियों को 2024 में ही इस मामले में जांच समिति की ओर से चेतावनी दी गई थी। अब बंद कमरे में होने वाली सुनवाई के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद संभावित खामियों के लिए उनकी जिम्मेदारी तय करने पर विचार किया जाएगा।
जांच समिति ने ज़ायोनी सेना के मौजूदा प्रमुख एयाल जमीर, नौसेना के कमांडर एयाल हारेल और इस्राईल के पूर्व राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन को भी गवाही देने के लिए बुलाया है।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों को इस मामले में संदिग्ध नहीं माना गया है।
‘केस 3000’ इस्राईल में जर्मनी से पनडुब्बियों और युद्धपोतों की खरीद से जुड़ा विवाद है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन सौदों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई खामी हुई थी या नहीं और क्या इन फैसलों से इजरायल की सुरक्षा प्रभावित हुई।
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